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बड़कागांव में कोल खनन के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन तेज, त्रिपक्षीय जन सुनवाई रद्द

बड़कागांव क्षेत्र में प्रस्तावित कोल खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। बीते 1013 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि जीवन और भविष्य की रक्षा की है। आज पर्यावरण समिति, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया।

धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि खनन परियोजना उन्हें रोज़गार नहीं, बल्कि तबाही और मौत देती है, जबकि उनकी जमीन उन्हें अन्न और सम्मान देती है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़कागांव और आसपास का इलाका बहुफसली कृषि क्षेत्र है, जहां धान, सब्ज़ी, ईख जैसी फसलें होती हैं। यही खेती उनकी आजीविका का मुख्य आधार है।

आंदोलनकारियों ने यह भी याद दिलाया कि बड़कागांव को कभी धान का कटोरा कहा जाता था और गोंडलपुरा क्षेत्र ईख व गुड़ उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है। ऐसे में कोल खनन से न सिर्फ किसानों की जमीन छीनी जाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना परियोजना थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक खनन परियोजना पूरी तरह रद्द नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन जारी रहेगा।

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