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चाईबासा में तसर बीज उत्पादन पर कार्यशाला, जनजातीय आजीविका सुदृढ़ करने में युवाओं की भूमिका पर जोर

 

चाईबासा : भारत सरकार के केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय) की ओर से चाईबासा में “तसर बीज उत्पादन में नवीन प्रगति एवं भावी रणनीतियां: जनजातीय सशक्तिकरण एवं युवा सहभागिता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। चाईबासा स्थित सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) कार्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) आदित्य नारायण, सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) रविशंकर प्रसाद सहित केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएफओ आदित्य नारायण ने जनजातीय समुदाय की आजीविका विकास में तसर संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेरिकल्चर क्षेत्र में झारखंड, खासकर कोल्हान ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने युवाओं की बढ़ती सहभागिता को इस क्षेत्र के विकास के लिए बेहद सकारात्मक बताया और कहा कि रेशम उद्योग से जुड़कर युवा आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक-डी डॉ. जय प्रकाश पाण्डेय ने स्वागत भाषण देते हुए तसर बीज उत्पादन में नवीन वैज्ञानिक प्रगति एवं भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों पर भी प्रकाश डालते हुए कोल्हान समेत पूरे झारखंड में तसर से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

वहीं सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) रविशंकर प्रसाद ने तसर आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। तकनीकी सत्र में केंद्रीय रेशम बोर्ड के डॉ. जेपी पाण्डेय तथा बीएसएमटीसी खरसावां के वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने तसर बीज उत्पादन की उन्नत तकनीकों और सफल बीज फसल उत्पादन के प्रमुख कारकों पर विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर चाईबासा पीपीसी के पायलट प्रोजेक्ट अधिकारी प्रदीप कुमार महतो ने झारखंड में तसर रेशम कीट पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं पीपीसी खरसावां के पीपीओ नितीश कुमार ने कोल्हान क्षेत्र की पर्यावरणीय परिस्थितियों एवं तसर पालन में उनकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला का आयोजन सीएसबी-बीटीएसएसओ बेसिक सीड मल्टीप्लिकेशन एंड बीएसएमटीसी ट्रेनिंग सेंटर, खरसावां के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में कुल 98 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें किसान, तसर कीटपालक, शोधकर्ता, वैज्ञानिक, तकनीकी कर्मचारी, पायलट प्रोजेक्ट अधिकारी (PPO) तथा झारखंड तसर तकनीकी विकास संस्थान के प्राचार्य एवं विद्यार्थी शामिल थे।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवाद एवं अनुभव साझा करने के साथ-साथ व्यावहारिक जानकारी के लिए क्षेत्र भ्रमण भी कराया गया, जहां तसर कोकून उत्पादन से संबंधित डेमोस्ट्रेशन भी प्रस्तुत किया गया।

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