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वेरी पॉजिटिव: कमर्शियल रसोई गैस की कमी से जूझ रहे रेस्टोरेंट और होटल व्यवसाय के लिए राहत भरी खबर; सरायकेला के प्रतिष्ठित सुभाष स्वीट्स ने इको फ्रेंडली बायो पेललेट चूल्हा से शुरू की नई पहल।

सरायकेला। महान दार्शनिक प्लेटो का कथन “आवश्यकता आविष्कार की जननी है” की प्रासंगिकता को कई आपदा के अवसर पर चरितार्थ होते हुए देखा गया है। आज के वर्तमान समय में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का प्रभाव देश में विशेष रूप से रसोई गैस ईंधन और पेट्रोलियम पदार्थों पर देखा जा रहा है। जिसमें विगत लगभग एक महीने से अधिक समय से कमर्शियल रसोई गैसों की किल्लत का परिणाम रहा कि सरायकेला नगर क्षेत्र के लगभग रेस्टोरेंट और होटल प्रभावित रहे। जिला मुख्यालय और कला की नगरी के साथ-साथ विशेष रूप से सरायकेला के प्रसिद्ध लड्डू के कारण यहां आने वालों को नाश्ते तक की किल्लत होने लगी। वही प्रभावित रेस्टोरेंट और होटल संचालकों ने अपने व्यवसाय को बनाए रखना और कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए कमर्शियल रसोई गैस से किनारा करते हुए देखे गए। इसी क्रम में सरायकेला के प्रतिष्ठित सुभाष स्वीट्स ने शहर में एक नई शुरुआत करते हुए अपने कर्मचारियों के मनोबल को बनाए रखना और अपने ग्राहकों की सेवा के लिए शहर में एक नई शुरुआत की। जिसके तहत अपने रेस्टोरेंट के मिष्ठान और पकवान तैयार करने के लिए उन्होंने इको फ्रेंडली बायो पेललेट चूल्हा स्थापित कराया।

 

कमर्शियल रसोई गैस से 40% तक सस्ती बायो पेललेट चूल्हा:-

इको फ्रेंडली बायो पेललेट चूल्हा पर्यावरण प्रेमी है। इसमें ईंधन के रूप में लकड़ी के बुरादे और कृषि अवशेष जैसे धान के भूसे और लकड़ी का कचरा को रीसायकल कर दबा कर बनाया जाता है। यह ईंधन पूरी तरह से प्राकृतिक और रीसायकल मटेरियल से तैयार किया जाता है। ऐसे कठिन समय में एक सस्ता और टिकाऊ समाधान के रूप में बायो पेललेट चूल्हा उपयोग में कमर्शियल रसोई गैस की अपेक्षा 40% तक सस्ता एवं सुरक्षित बताया जा रहा है।

 

दर्द की अंतरात्मा की आवाज:-

सुभाष स्वीट्स के संचालक सुभाष चंद्र साहू बताते हैं कि सरायकेला के प्रसिद्ध लड्डू सहित अन्य मिष्ठानों और नाश्ते के प्रति लोगों का विशेष विश्वास उनके रेस्टोरेंट पर रहा है। ऐसे आपदा काल में कमर्शियल रसोई गैस नहीं उपलब्ध होने के कारण रेस्टोरेंट लगभग पूरी तरह से ठप्प हो चुका था। प्रतिदिन ग्राहकों की खीझ के साथ-साथ स्टाफ की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मानसिक तनाव भी बढ़ने लगा। इसी दौरान महाप्रभु श्री जगन्नाथ और भगवान श्री राधा कृष्ण की प्रेरणा से तलाश के क्रम में चूल्हे की जानकारी हुई। जिसके ईंधन के लिए रीसायकल सेंटरों के चक्कर लगाकर वर्तमान में सब कुछ पूर्व की स्थिति में लौटने लगा है। बताया गया कि यह चूल्हा खास तौर पर पूरे शहर के रेस्टोरेंट और होटलों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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