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हूल दिवस पर बतरबेड़ा-नावाडीह में खेल और संस्कृति का संगम, आदिवासी ड्रामा ने जीता लोगों का दिल

 

सरायकेला: राजनगर प्रखंड के केंदमुंडी पंचायत अंतर्गत बतरबेड़ा-नावाडीह गांव में वीर सिदो-कान्हु हूल गांवता समिति की ओर से हूल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन पारंपरिक उत्साह के साथ हुआ। समापन समारोह में झामुमो के केंद्रीय सदस्य कृष्णा बास्के और वरिष्ठ झामुमो नेता कालीपद (केपी) सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन समिति ने दोनों अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाज से अंगवस्त्र और बैच पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने संयुक्त रूप से फीता काटकर आदिवासी ड्रामा प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृष्णा बास्के ने कहा कि वीर सिदो-कान्हु का संघर्ष आज भी समाज को अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा और जागरूकता ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम है। वहीं कालीपद (केपी) सोरेन ने समाज की एकजुटता को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए लोगों से सामाजिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने की अपील की।

कार्यक्रम के पहले दिन विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मोमबत्ती दौड़, बैलून फोड़, बॉल पास और ओल चिकी सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

समापन समारोह का मुख्य आकर्षण आदिवासी ड्रामा प्रतियोगिता रही। इसमें आठ टीमों ने सामाजिक कुरीतियों, शिक्षा, आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर आधारित नाटकों का प्रभावशाली मंचन किया। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर बांधे रखा।

इस अवसर पर झामुमो बुद्धिजीवी मंच के जिला अध्यक्ष दुर्गालाल मुर्मू, प्रखंड अध्यक्ष रामसिंह हेम्ब्रम, उपाध्यक्ष भक्तू मार्डी, पूर्व प्रखंड अध्यक्ष रामजीत हांसदा, शेखर महाकुड़, सोनाराम मुर्मू, सिबिल देवगम, शांतिलता, सरस्वती सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे। आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष मुकरु मुर्मू, सचिव बाबूराम हांसदा तथा अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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