पोटका के सानग्राम में रात्रि चौपाल लगाकर किया कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक
‘मेरी दोस्ती तुमसे’ अभियान के नौवें दिन ग्रामीणों को दी गई कुष्ठ रोग के लक्षण, उपचार और बचाव की जानकारी

पोटका (पूर्वी सिंहभूम)। पूर्वी सिंहभूम जिले में कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 100 दिवसीय ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ (एमडीटी) अभियान के नौवें दिन शुक्रवार को पोटका प्रखंड के सानग्राम गांव में रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को कुष्ठ रोग के लक्षण, उपचार, बचाव और इससे जुड़े सामाजिक मिथकों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान एमपीडब्ल्यू उपेंद्रनाथ मोदिना ने ग्रामीणों को अभियान की गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर 2026 से 30 जनवरी 2027 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और समय पर मरीजों की पहचान कर उपचार सुनिश्चित करना है।
सानग्राम के मुखिया संजय सरदार ने कहा कि शरीर पर किसी भी प्रकार का दाग होने और उस स्थान पर निश्चित रूप से सुन्नपन महसूस होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग न तो अभिशाप है और न ही पिछले जन्म का पाप। यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जिसका इलाज सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से दिव्यांगता से बचा जा सकता है।
वहीं, उपमुखिया पदो हांसदा ने कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों और इसके कारण होने वाली दिव्यांगता के बारे में जानकारी दी। एमपीडब्ल्यू तुषार मंडल ने सेल्फ केयर के महत्व को समझाते हुए बताया कि कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के लिए नियमित देखभाल आवश्यक है। उन्होंने रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के माध्यम से कुछ प्रकार की दिव्यांगता में सुधार की जानकारी भी दी। साथ ही सहियाओं को कुष्ठ रोग से संबंधित कार्यों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के बारे में बताया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में एमपीडब्ल्यू उपेंद्रनाथ मोदिना, मुखिया संजय सरदार, देवाशीष भगत, पलास मंडल, दीपांकर, तुषार मंडल, लैब टेक्नीशियन अंबुज गोप सहित ग्रामीणों का योगदान रहा।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई देने पर छिपाने या भेदभाव करने के बजाय समय पर जांच और उपचार कराएं। जागरूकता, समय पर इलाज और सामाजिक सहयोग से इस बीमारी से होने वाली दिव्यांगता को रोका जा सकता है।


