Saturday, July 4, 2026
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झारखंड में पहली बार विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल होगा स्पेस फिजिक्स, श्रीनाथ विश्वविद्यालय ने आईसीएसपी के साथ किया एमओयू

 

 

जमशेदपुर: झारखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। पहली बार राज्य के किसी विश्वविद्यालय में स्पेस फिजिक्स (अंतरिक्ष भौतिकी) को शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसके लिए श्रीनाथ विश्वविद्यालय, जमशेदपुर और इंडियन सेंटर फॉर स्पेस फिजिक्स (आईसीएसपी), कोलकाता के बीच शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

 

समझौते पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. यह्या मजूमदार और आईसीएसपी के निदेशक प्रो. (डॉ.) संदीप चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च डॉ. शैलेश कुमार सारंगी, डीन प्रशासन डॉ. जे. राजेश तथा सहायक डीन डॉ. सुदर्शना बनर्जी भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि यह पहल झारखंड में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

 

इस सहयोग के तहत दोनों संस्थान मिलकर स्पेस फिजिक्स और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करेंगे। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए संयुक्त शोध परियोजनाएं, इंटर्नशिप, प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञ व्याख्यान, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाएं तथा वैज्ञानिक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।

 

इस पहल से छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान के कई उन्नत क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। इनमें एक्स-रे डिटेक्टर, कॉस्मिक किरणों का अध्ययन, रेडियो इंटेंसिटी मापन, सौर गतिविधियों का विश्लेषण, स्पेस वेदर और हाई-एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स जैसे विषय शामिल हैं। साथ ही आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

 

विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह समझौता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अनुसंधान, नवाचार और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देगा। इससे विद्यार्थियों को अत्याधुनिक वैज्ञानिक विषयों में अध्ययन और शोध के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा भविष्य में देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों और अंतरिक्ष एजेंसियों में करियर बनाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

 

शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल झारखंड में विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे राज्य को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय विद्यार्थियों को अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध का अवसर प्राप्त होगा।

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