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171वें हूल दिवस पर सिद्धो-कान्हू को श्रद्धांजलि, पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता बोले— हूल दिवस का उद्देश्य अभी अधूरा

 

सरायकेला-खरसावां: 171वें हूल दिवस के अवसर पर सिद्धो-कान्हू चौक पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अमर शहीद सिद्धो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, सीपीएम के जिला सचिव गणेश कुमार सीटू, स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता, झामुमो के नीलकंठ महतो, विकास राणा, निसार अहमद, खलील अंसारी, सीपीआई के जिला सचिव अनिरुद्ध प्रसाद, प्रविल प्रसाद मेहता, अनंत आर्या, आजसू के विजय वर्मा, रमेश हेंब्रम सहित कई लोग उपस्थित रहे।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि आज भी इन मुद्दों पर संघर्ष की आवश्यकता बनी हुई है और हूल दिवस का मूल उद्देश्य पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है।

सीपीएम के जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ने कहा कि हूल आंदोलन अंग्रेजी शासन के खिलाफ संगठित प्रतिरोध का महत्वपूर्ण अध्याय था। उन्होंने कहा कि कई इतिहासकारों ने इसे सीमित दायरे में देखा, जबकि इसे देश के शुरुआती स्वतंत्रता आंदोलनों में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए।

वहीं, स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि शहीद सिद्धो-कान्हू के सपनों का झारखंड बनाने की जिम्मेदारी आज की पीढ़ी पर है। उन्होंने लोगों से शहीदों के आदर्शों को अपनाकर समाज और राज्य के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

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