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जामबनी ग्रामसभा बैठक में युवाओं का फूटा गुस्सा, बुनियादी सुविधाओं को लेकर जताई नाराजगी

 

 

सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत जामबनी गांव में रविवार को ग्राम प्रधान आलोक रंजन की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा बैठक में युवाओं ने गांव की अनदेखी पर कड़ा विरोध जताया। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।

 

युवाओं ने आरोप लगाया कि प्राथमिक विद्यालय जर्जर अवस्था में है, न तो चारदीवारी बनी है और न ही स्कूल तक जाने के लिए पक्का रास्ता। आंगनबाड़ी केंद्र की छत से बरसात में पानी टपकता है। गांव की कई गलियां अब तक पक्की सड़क से वंचित हैं और जल मिशन का अधूरा कार्य भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि समस्याओं को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। युवाओं ने खासतौर से बताया कि उन्होंने ग्राम प्रधान आलोक रंजन महतो और बड़ा सिजुलत पंचायत की मुखिया निर्मला सरदार से कई बार संपर्क किया, लेकिन समाधान नहीं मिला। यह बैठक भी युवाओं के लगातार आग्रह पर बुलाई गई।

 

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि करीब एक साल से ग्रामसभा आयोजित नहीं हुई थी। युवाओं ने सवाल उठाया कि जब समस्याएं सबको मालूम हैं तो समाधान क्यों नहीं किया गया।

 

युवक राकेश और आशीष ने कहा – “सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी और चुने हुए प्रतिनिधि दोनों ही लगातार गांव की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं।”

 

बैठक में युवाओं ने स्पष्ट किया कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होंगे।

 

यह बैठक एक बार फिर यह बड़ा सवाल छोड़ गई कि असल जिम्मेदारी किसकी है – सरकारी अधिकारियों की, जनप्रतिनिधियों की या फिर ग्रामीणों की, जो वर्षों से चुपचाप इस हालात को झेलते आ रहे हैं।

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