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चांडिल डैम विस्थापितों का धरना, 43 वर्षों से लंबित पुनर्वास की मांग

चांडिल में स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना से विस्थापित लोगों ने मंगलवार को पुनर्वास कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के बैनर तले सैकड़ों लोग जुटे और कार्यालय का गेट जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने 43 वर्षों से लंबित पुनर्वास, मुआवजा और नौकरी से जुड़ी मांगों को लेकर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

 

फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि चांडिल डैम बनने से 116 गांवों के परिवार विस्थापित हुए, लेकिन आज तक उन्हें उनका वैध हक नहीं मिला। कई बार सरकार को ज्ञापन, धरना और अनशन के माध्यम से अपनी बात रखने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे, जिन्होंने नारेबाजी करते हुए कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा।

 

विस्थापितों ने परियोजना से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने विस्थापितों के हक़ का धन हड़प लिया है। मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने इन पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की और कहा कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

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