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श्रीनाथ कॉलेज में नवाचारी शिक्षण पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

जमशेदपुर, 

श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन, आदित्यपुर में मंगलवार को “21वीं सदी के कक्षा-कक्ष के लिए नवाचारी शिक्षण रणनीतियाँ” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। बहुउद्देशीय हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज के सभी शिक्षक-शिक्षिका और बी.एड. के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक दोनों रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्या डॉ. मौसुमी महतो के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने तेजी से बदलते शैक्षणिक परिवेश में नवाचारी शिक्षण तकनीकों की अनिवार्यता पर जोर दिया। प्राचार्या ने कहा कि आज के समय में शिक्षक की भूमिका महज पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विद्यार्थियों को समझने, उनसे संवाद स्थापित करने और उन्हें नए तरीकों से सीखने को प्रेरित करने वाला मार्गदर्शक भी होता है।

मुख्य वक्ता के रूप में डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्य डॉ. जूही समर्पिता और महिला कॉलेज, चाईबासा के सहायक प्राध्यापक डॉ. अर्पित सुमन उपस्थित थे।

डॉ. जूही समर्पिता ने अपने संबोधन में कहा कि “कक्षा-कक्ष वह जगह है जहाँ देश का भविष्य तैयार होता है।” उन्होंने बताया कि पाठ्यपुस्तक-आधारित पारंपरिक शिक्षण अब पर्याप्त नहीं है। आज आवश्यकता है नवाचार की—ऐसे रचनात्मक तरीकों की जो विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रेरित करें।

वहीं, डॉ. अर्पित सुमन ने जोर देते हुए कहा कि सीखना कभी नीरस नहीं होना चाहिए। उन्होंने इंटरएक्टिव शिक्षण तकनीकों, गतिविधि-आधारित शिक्षा और छात्र-केंद्रित कक्षा की जरूरत पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कई व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस तरह शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम का संचालन कुशलतापूर्वक श्रीमती रचना रश्मि ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक जयश्री सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।

वहीं, कार्यक्रम का सारांश बिनय सिंह ने रखा और सभी अतिथियों व प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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