गम्हारिया में अवैध फ्लैट निर्माण का मामला गरमाया, बिना नक्शा पास किए चल रहा काम

सरायकेला-खरसावाँ: जिले के गम्हारिया प्रखंड अंतर्गत लाल बिल्डिंग के समीप अवैध फ्लैट निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था एवं संबधित विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, आदित्यपुर-1 निवासी पवन प्रसाद ने इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी 2026 को उन्होंने अपनी जमीन के डेवलपमेंट के लिए एक एग्रीमेंट किया था, लेकिन बिल्डर रविंद्र कुमार सिन्हा द्वारा एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करते हुए बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे से अलग तरीके से किया जा रहा है, जिससे उनकी जमीन पर अवैध निर्माण हो रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस संबंध में बिल्डर से बात की, तो उन्हें धमकाया गया और कहा गया, “यह मेरी जमीन है, तुम कुछ नहीं कर पाओगे।”

मामले को लेकर पीड़ित ने JLKM सुप्रीमो टाइगर जयराम को आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के कोल्हान प्रमंडल अध्यक्ष नवीन महतो ने नगर निगम प्रशासन को पत्र लिखकर अविलंब कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्माण कार्य नहीं रोका गया, तो पार्टी को मजबूरन खुद हस्तक्षेप कर कार्य रुकवाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इधर, आदित्यपुर नगर निगम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए नोटिस जारी किया था नोटिस के तहत दोनों पक्षों को 11 अप्रैल 2026 को कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया था, साथ ही स्पष्ट किया गया था कि अनुपस्थित रहने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि 11 अप्रैल को नगर निगम में सुनवाई के दौरान यह जानकारी मिली कि पीड़ित के नाम से वर्ष 2025 में ही नक्शा पास कराने का आवेदन दिया गया था, जबकि पीड़ित का दावा है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
नगर निगम द्वारा कार्य रोकने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य जारी रहने की बात सामने आ रही है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने क्षेत्र में अवैध निर्माण, संभावित फर्जी दस्तावेज और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।

