सरायकेला में आरबीआई की नगर समागम बैठक, एमएसएमई को ऋण और बैंकिंग सुविधाओं पर जोर

सरायकेला-खरसावां जिले में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक, रांची कार्यालय की ओर से शुक्रवार को नगर समागम बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय रिजर्व बैंक, झारखंड की क्षेत्रीय निदेशक रक्षा मिश्र ने की।


बैठक में एमएसएमई क्षेत्र के विकास, उद्यमियों तक ऋण और बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच तथा नियामकीय प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में आरबीआई के उप महाप्रबंधक, एमएसएमई-डीएफओ के निदेशक, एसएलबीसी के उप महाप्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक समेत विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, आदित्यपुर लघु उद्योग संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में उद्यमी शामिल हुए।
अपने संबोधन में क्षेत्रीय निदेशक रक्षा मिश्र ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने आरबीआई की ओर से एमएसएमई के लिए लागू विभिन्न प्रावधानों और सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिना संपार्श्विक ऋण की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई है, जबकि सुदृढ़ वित्तीय रिकॉर्ड वाले उद्यमों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये तक है।

उन्होंने 25 लाख रुपये तक के एमएसई ऋण आवेदनों पर 14 कार्य दिवसों के भीतर निर्णय, सरल भाषा में की-फैक्ट्स स्टेटमेंट, टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म, फ्लोटिंग रेट ऋण के पूर्व भुगतान से जुड़े प्रावधान और सीजीटीएमएसई कवरेज के विस्तार की भी जानकारी दी।
आरबीआई की क्षेत्रीय निदेशक ने बैंकों से नियामकीय प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की। वहीं, उद्यमियों और उद्योग संघों से उपलब्ध बैंकिंग सुविधाओं और आरबीआई के प्रावधानों की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर जागरूकता सत्र भी आयोजित किए। कुछ उद्यमियों ने अपनी उद्यमिता यात्रा, संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं। कार्यक्रम स्थल पर जिले और राज्य के विभिन्न उद्यमियों की ओर से उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें स्थानीय एमएसएमई उत्पादों, नवाचार और उद्यमिता की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया।
नगर समागम बैठक का मुख्य उद्देश्य उद्यमियों, बैंकों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, ऋण एवं बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच आसान बनाना और एमएसएमई क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देना रहा।


