उड़िया सिलेबस देवनागरी में जारी होने पर बवाल, राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन

JHTET सिलेबस विवाद को लेकर सरायकेला में उबाल, उड़िया भाषी समुदाय ने जताया विरोध


सरायकेला–खरसावाँ।
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JHTET) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। उड़िया भाषा के सिलेबस को उसकी मूल लिपि की बजाय देवनागरी लिपि में जारी किए जाने पर सरायकेला–खरसावाँ जिले में उड़िया भाषी समुदाय आक्रोशित है। सोमवार को स्थानीय प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त उपायुक्त से मुलाकात कर इस संबंध में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड अधिविध परिषद (JAC) द्वारा जारी किए गए उड़िया सिलेबस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि उड़िया भाषा की अपनी स्वतंत्र लिपि, व्याकरण और ऐतिहासिक पहचान है। ऐसे में देवनागरी लिपि में सिलेबस जारी किया जाना न केवल भाषा का अपमान है, बल्कि संविधान में प्रदत्त भाषाई अधिकारों का उल्लंघन भी है। प्रतिनिधियों का कहना है कि इस निर्णय से उड़िया माध्यम के अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि JHTET सिलेबस में उड़िया विषय के लिए अन्य भाषाओं की तरह गद्यांश और पद्यांश शामिल नहीं किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भाषा के साथ भेदभाव किया गया है। साथ ही, उन्होंने मांग की कि उड़िया भाषा के लिए मॉडल प्रश्न पत्र भी उड़िया लिपि में ही जारी किए जाएँ।
प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें:
• उड़िया सिलेबस उड़िया लिपि में प्रकाशित किया जाए
• गद्यांश एवं पद्यांश को सिलेबस में शामिल किया जाए
• मॉडल प्रश्न पत्र उड़िया लिपि में जारी किया जाए
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधियों में नंदू कुमार पाण्डेय, सनन्द आचार्य, पितोबास प्रधान, डॉ. रंजीत आचार्य, तरुण कुमार पानी और संजय कुमार महांति शामिल थे।
समुदाय का कहना है कि वे चाहते हैं कि सरकार तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और उड़िया भाषी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करे। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे पर क्या निर्णय लेते हैं।

