सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक सेवा भर्ती फैसले का अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने किया स्वागत
जमशेदपुर। समाजवादी चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने न्यायिक सेवा में प्रवेश से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा में नियुक्ति के लिए वकालत के अनुभव से संबंधित नियमों में किए गए बदलाव से कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले योग्य युवाओं के लिए न्यायपालिका में प्रवेश का रास्ता आसान होगा।

अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए अनिवार्य वकालत अनुभव से जुड़े प्रावधान में बदलाव किया है। फैसले के तहत चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण और क्लर्कशिप की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसके बाद उनके प्रदर्शन और मूल्यांकन के आधार पर नियमित नियुक्ति का प्रावधान रहेगा।
उन्होंने बताया कि मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अगस्त जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन शामिल हैं, ने ‘रोल ट्रस्ट बनाम भारत संघ’ समेत संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है।
उन्होंने बताया कि संक्रमणकालीन अवधि में आने वाले उम्मीदवारों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। इसके तहत निर्धारित अवधि में जारी परीक्षा अधिसूचनाओं के आधार पर पात्र उम्मीदवारों को चयन के बाद प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें राज्य न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण के साथ निर्धारित अवधि की क्लर्कशिप भी पूरी करनी होगी।
क्लर्कशिप के दौरान शुरुआती छह महीने प्रधान जिला न्यायाधीश या उच्चतर न्यायिक सेवा के किसी सदस्य की निगरानी में तथा अगले छह महीने संबंधित हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश की देखरेख में काम करने की व्यवस्था बताई गई है। संतोषजनक मूल्यांकन के बाद नियमित नियुक्ति और वेतनमान मिलने का प्रावधान होगा।
अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि आगे जारी होने वाली न्यायिक सेवा परीक्षा की अधिसूचनाओं के लिए उम्मीदवारों के पास कम से कम एक वर्ष का सत्यापित सक्रिय वकालत अनुभव होना जरूरी होगा। चयन के बाद उम्मीदवारों को न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण और दो चरणों में क्लर्कशिप की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
उन्होंने कहा कि पहले वकालत के अनुभव की अनिवार्यता के कारण कई मेधावी कानून स्नातक पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद न्यायिक सेवा में जाने से पीछे हट सकते थे। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस व्यवस्था में संतुलन आएगा और योग्य कानून स्नातकों को न्यायिक सेवा में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

दीपक महतो – संस्थापक, छोटानागपुर लाइव
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