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मांदर की थाप और झुमर के रंग में सराबोर हुआ राजनगर, देश करम महोत्सव में देर रात तक झूमे लोग

 

राजनगर। सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित ब्लॉक मैदान में रविवार को देश करम एकता संघ, राजनगर प्रखंड के तत्वावधान में देश करम महोत्सव 2026 पारंपरिक रीति-रिवाज और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। करम पूजा, पारंपरिक गीत-संगीत, मांदर की थाप और झुमर की शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। देर रात तक चले इस महोत्सव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और पारंपरिक नृत्य-संगीत का आनंद उठाया।

 

महोत्सव का शुभारंभ चुका पहाड़ में करम वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के बीच करम डाइर यानी करम की पवित्र शाखाओं को कार्यक्रम स्थल तक लाया गया। नेग-नेगाचारी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करम डाइर को अखड़ा में स्थापित किया गया। पूजा-अर्चना के बाद मांदर की गूंज के साथ करम गीतों का दौर शुरू हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुषों ने अखड़ा में नृत्य कर झारखंडी संस्कृति और लोक परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

 करम पर्व झारखंडी संस्कृति की पहचान : अमोदिनी महतो

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद सदस्य अमोदिनी महतो ने कहा कि करम पर्व पूर्वजों से मिली अमूल्य सांस्कृतिक विरासत है। यह झारखंडी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की पहचान है। इस विरासत को संरक्षित रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि करम पूजा के माध्यम से लोग सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। बदलते समय में अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है।

 मेधावी विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित

 

महोत्सव के दौरान मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। समाजसेवी हरमोहन महतो ने कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करने से उनका मनोबल बढ़ता है और दूसरे विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के विद्यार्थी भविष्य में जेपीएससी समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर राजनगर और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।

 

इस अवसर पर हरमोहन महतो ने धर्म कोड लागू करने, कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग भी उठाई।

 

 झुमर की प्रस्तुतियों पर देर रात तक झूमते रहे दर्शक

 

महोत्सव के दूसरे चरण में आयोजित झुमर कार्यक्रम आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। जुनून रोसोकिया झुमर ग्रुप, रंजीत महतो के नेतृत्व में गोपीपुर, मनोहरपुर से पहुंची कलाकारों की टीम ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक गीत और झुमर नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। मांदर की थाप और झुमर की मधुर धुनों से पूरा ब्लॉक मैदान गूंज उठा। कार्यक्रम के माध्यम से झारखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला का भव्य प्रदर्शन हुआ।

 

मौके पर गणेश महाली, दुर्गालाल मुर्मू, जेएलकेएम के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रेम मार्डी, भक्तू मार्डी, मुखिया राजो टुडू, दिलीप महतो, घनश्याम महतो समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। महोत्सव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही।

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