कुकड़ू प्रखंड की उपेक्षा पर राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग, ईमेल के माध्यम से भेजा गया ज्ञापन : विद्रोही बिष्णु

सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत कुकड़ू प्रखंड की वर्षों से लंबित जनसमस्याओं को लेकर *JLKM पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता बिष्णु पद महतो उर्फ़ “विद्रोही बिष्णु”* ने माननीय राज्यपाल महोदया को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


ज्ञापन में कुकड़ू प्रखंड की प्रशासनिक अव्यवस्था, सुरक्षा संबंधी समस्याओं तथा किसानों की बदहाल स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कुकड़ू एक स्वतंत्र प्रखंड होने के बावजूद आज भी कई महत्वपूर्ण विभाग अतिरिक्त प्रभार के भरोसे संचालित हो रहे हैं। अंचल अधिकारी (CO), मंडल अधिकारी (MO), बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर नियमित पदस्थापना नहीं होने से आम जनता को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विद्रोही बिष्णु ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि कुकड़ू थाना भवन का निर्माण हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन आज तक थाना का संचालन प्रारंभ नहीं किया गया है। करोड़ों रुपये खर्च कर भवन निर्माण के बावजूद थाना चालू नहीं होना सरकार और प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भवन तैयार है तो आखिर थाना संचालन में देरी क्यों की जा रही है?
ज्ञापन में कुकड़ू क्षेत्र में हाथियों के बढ़ते उत्पात का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि आए दिन किसानों की मेहनत से तैयार फसलें जंगली हाथियों द्वारा बर्बाद कर दी जाती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि चांडिल डैम के पूर्ण डूबी क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसानों को फसल क्षति के बावजूद मुआवजा नहीं मिल पाता, जिसके कारण वे दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।
विद्रोही बिष्णु ने राज्यपाल महोदया से कुकड़ू प्रखंड में सभी महत्वपूर्ण पदों पर नियमित पदाधिकारियों की नियुक्ति, कुकड़ू थाना का शीघ्र संचालन तथा हाथी प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत एवं मुआवजा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि कुकड़ू की जनता वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा, सुरक्षा व्यवस्था की कमी और किसानों की समस्याओं से जूझ रही है। अब समय आ गया है कि सरकार घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर समाधान प्रस्तुत करे।
*”कुकड़ू की जनता अधिकार मांग रही है, एहसान नहीं। प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और किसानों के न्याय के सवाल पर अब और चुप्पी स्वीकार नहीं की जाएगी।”*


