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कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पहल पर कुड़मी समाज ने जताया आभार

 

सरायकेला-खरसावां। कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर सांसद ज्योतिरमय सिंह महतो समेत अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र सौंपे जाने के बाद कुड़मी समाज में खुशी का माहौल है। इस पहल को समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस पहल में जमशेदपुर के लोकप्रिय सांसद विद्युत वरुण महतो तथा पश्चिम बंगाल के कुड़मी समाज के मूल खुटा अजीत प्रसाद महतो भी मौजूद रहे। उनके साथ जनप्रतिनिधियों ने कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को मजबूती से उठाया।

झारखंड कुड़मी समाज के युवा नेता गौतम महतो ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जमशेदपुर सांसद विद्युत वरुण महतो, पश्चिम बंगाल के मूल खुटा अजीत प्रसाद महतो और कुड़माली भाषा की मांग को आगे बढ़ाने वाले सभी कुड़मी नेताओं के प्रति पूरे कुड़मी समाज की ओर से आभार जताया है।

 

 

गौतम महतो ने कहा कि कुड़माली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार समेत विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं की पहचान है। कुड़माली भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने से भाषा, साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं विकास को नई दिशा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब इस दिशा में जनप्रतिनिधियों की पहल से समाज में नई उम्मीद जगी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मांग पर सकारात्मक और ठोस कदम उठाने की अपील की।

गौतम महतो ने कहा कि अगर केंद्र सरकार इसी तरह कुड़मी समाज की भावनाओं और मांगों के प्रति सकारात्मक एवं दोस्ताना रवैया बनाए रखती है, तो आने वाले समय में इसका राजनीतिक लाभ भी भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि समाज अपने अधिकार, भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल का सम्मान करेगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में जल्द आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी और यह कदम कुड़मी समाज के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।

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