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ऑपरेशन नवजीवन-III में बड़ी कामयाबी, चार माओवादियों ने हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण

 

 

चाईबासा/सरायकेला। कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के जंगलों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े चार सक्रिय सदस्यों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के सामने हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य सलुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ डांगिल भी शामिल है।

 

आत्मसमर्पण करने वाले अन्य सदस्यों में एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कोदम मुनी, दस्ता सदस्य पिंकी पूर्ति उर्फ सकाती पूर्ति और अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम उर्फ मुक्ता शामिल हैं। इनमें सलुका कायम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी पूर्ति ने चाईबासा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जबकि अनिता तामसोय ने सरायकेला-खरसावां पुलिस के सामने हथियार छोड़े।

 

सुरक्षा बलों के अनुसार आत्मसमर्पण के दौरान चारों के पास से एके-47, इंसास राइफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और 2200 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक सलुका कायम संगठन में जोनल कमेटी सदस्य के तौर पर सक्रिय था। उसके खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम में 90 और सरायकेला-खरसावां जिले में छह मामले दर्ज हैं। यानी उसके खिलाफ कुल 96 मामले हैं। उसके पास से एक एके-47 राइफल, दो मैगजीन और 843 कारतूस बरामद किए गए।

 

एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा के खिलाफ चाईबासा में सात मामले दर्ज हैं। उसके पास से वायरलेस सेट और 697 कारतूस मिले हैं। वहीं पिंकी पूर्ति के खिलाफ चाईबासा जिले में 13 मामले दर्ज हैं और उसके पास से वायरलेस सेट के साथ 639 कारतूस बरामद किए गए।

 

सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाली अनिता तामसोय के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम में 12 और सरायकेला-खरसावां में एक मामला दर्ज है। उसके पास से इंसास राइफल, पांच मैगजीन और 97 कारतूस बरामद किए गए।

 

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार चारों आत्मसमर्पित माओवादियों के खिलाफ दोनों जिलों में कुल 129 मामले दर्ज हैं। इनमें सलुका कायम के खिलाफ 96, कोदोमुनी कोड़ा के खिलाफ सात, पिंकी पूर्ति के खिलाफ 13 और अनिता तामसोय के खिलाफ 13 मामले शामिल हैं।

 

डीआईजी ने कहा—हिंसा छोड़कर लौटें मुख्यधारा में

 

आत्मसमर्पण के मौके पर कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्टोफा ने इसे नक्सल विरोधी अभियान की अहम उपलब्धि बताया। उन्होंने अभियान के दौरान शहीद हुए पुलिस और केंद्रीय बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी।

 

डीआईजी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर माओवादी संगठन के खिलाफ अभियान चला रही हैं। लगातार कार्रवाई का असर संगठन पर दिखाई दे रहा है और कई बड़े कमांडर या तो गिरफ्तार किए जा चुके हैं या मुठभेड़ों में मारे गए हैं।

 

उन्होंने बचे हुए माओवादी सदस्यों से भी सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की। उनका कहना था कि हथियार और हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने का यह बेहतर मौका है।

 

उन्होंने सुरक्षा बलों को ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद कायम करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए सुरक्षा अभियान के साथ स्थानीय लोगों का विश्वास हासिल करना और विकास को आगे बढ़ाना भी जरूरी है।

 

सीआरपीएफ डीआईजी ने विकास पर दिया जोर

 

सीआरपीएफ चाईबासा डीआईजी ने भी चार माओवादियों के आत्मसमर्पण को महत्वपूर्ण सफलता बताया। उन्होंने कोल्हान में लंबे समय से चले नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों और अधिकारियों को नमन किया।

 

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से सारंडा और कोल्हान के जंगलों में हालात में काफी बदलाव आया है। अब सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने स्थानीय लोगों से विकास की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

 

सरायकेला एसपी ने कहा—अब सीमित रह गई नक्सली गतिविधियां

 

सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि जिले में माओवादी गतिविधियां अब काफी कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में करीब पांच से छह नक्सलियों के सक्रिय होने की जानकारी है।

 

एसपी ने बचे हुए नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार की पुनर्वास नीति के जरिए सम्मानजनक जीवन शुरू करने का अवसर मिलेगा। हालांकि हिंसा जारी रखने वालों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी रहेगी।

 

असीम मंडल का दस्ता सुरक्षा बलों के रडार पर

 

कोल्हान डीआईजी के अनुसार अब सुरक्षा बलों के सामने छोटे-छोटे बचे हुए माओवादी दस्तों की चुनौती है। असीम मंडल के दस्ते पर विशेष नजर रखी जा रही है और उसकी गतिविधियों के खिलाफ अभियान जारी है। उन्होंने असीम मंडल समेत अन्य बचे माओवादी सदस्यों से भी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की।

 

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2025 में चाईबासा पुलिस के समक्ष माओवादी संगठन के 10 सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद 21 मई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-I में 27 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने हथियार डाले थे। इस दौरान 16 हथियार और 3082 गोलियां बरामद हुई थीं।

 

28 जुलाई 2026 को ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत 14 माओवादी कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था। इनके पास से 10 हथियार और 1412 गोलियां बरामद की गई थीं। अब ऑपरेशन नवजीवन-III में चार सक्रिय सदस्यों के आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के अभियान की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

पुलिस के अनुसार वर्ष 2025-26 में जुलाई तक पश्चिमी सिंहभूम जिले में 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इसी अवधि में 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए, जबकि 60 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

 

तीन दशक की हिंसा के बाद विकास की उम्मीद

 

कोल्हान का इलाका करीब तीन दशक तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगल लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्र रहे। इस दौरान सुरक्षा बलों के कई जवान और अधिकारी शहीद हुए।

 

अब लगातार आत्मसमर्पण, गिरफ्तारियों और सुरक्षा अभियानों के कारण माओवादी संगठन की पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है। अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद क्षेत्र में विकास की गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

 

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि नक्सलवाद का स्थायी समाधान केवल अभियान से नहीं होगा। इसके लिए ग्रामीणों के साथ मजबूत संवाद, रोजगार के अवसर, बेहतर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना भी जरूरी है।

 

ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत चार माओवादियों का हथियार छोड़ना इसी बदलते माहौल का संकेत माना जा रहा है। सुरक्षा बलों ने साफ संदेश दिया है कि आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए सरकार की नीति के तहत रास्ता खुला है, लेकिन हिंसा जारी रखने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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