सरायकेला रथ मेला शांतिपूर्ण संपन्न, मेला समिति ने श्रद्धालुओं, प्रशासन और पत्रकारों का जताया आभार

सरायकेला:


महाप्रभु श्री जगन्नाथ की कृपा और लाखों श्रद्धालुओं की सहभागिता से संपन्न हुए सरायकेला के ऐतिहासिक रथ मेला-2026 के सफल आयोजन के बाद श्री जगन्नाथ मेला समिति, थाना चौक के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सरायकेला परिवार की सामूहिक श्रद्धा, सेवा, समर्पण और सहयोग का परिणाम है। दस दिवसीय रथ मेला पूरी तरह शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ, जो शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
समिति अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष गोविंद साहू, भोला महंती, सचिव छोटेलाल साहू, सांस्कृतिक सचिव रूपेश साहू सहित सभी समिति सदस्यों के अथक परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि गुंडिचा मंदिर की सजावट, देवसभा की भव्य झांकी, मीना बाजार, भोग-प्रसाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेला व्यवस्था को सफल बनाने में सभी ने दिन-रात मेहनत की।
उन्होंने प्रधान पुरोहित पंडित ब्रह्मानंद महापात्र, सानो आचार्य, श्री जगन्नाथ सेवा समिति के सेवायतों, कलाकारों, भोग-प्रसाद व्यवस्था से जुड़े लोगों, विद्युत एवं साउंड टीम, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कलाकारों और भक्ति संगीत संध्या से जुड़े सभी सहयोगियों का भी विशेष आभार व्यक्त किया।
प्रेस विज्ञप्ति में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर पंचायत की भूमिका की भी सराहना की गई। उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी, थाना प्रभारी एवं पुलिस बल के साथ नगर पंचायत के अधिकारियों और सफाई कर्मियों के योगदान को समिति ने मेला की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
समिति ने विपद तारिणी व्रत के अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं-बहनों के अनुशासन और सहयोग की भी प्रशंसा की। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया, फोटोग्राफरों और पत्रकारों का आभार जताते हुए कहा कि उनकी सकारात्मक और व्यापक कवरेज ने रथ मेला-2026 की गरिमा को और बढ़ाया।
अपने भावुक संदेश में अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि नीलाद्रि विजय के साथ गुंडिचा मंदिर का सिंहासन एक बार फिर रिक्त हो गया है और अब पूरा सरायकेला अगले वर्ष महाप्रभु के पुनः आगमन की प्रतीक्षा करेगा। उन्होंने श्रद्धा भाव से कहा, “प्रभु! अगले बरस जल्दी आना… आपके बिना यह आंगन सूना लगता है।”
उन्होंने अंत में कहा कि किसी भी बड़े लक्ष्य की सफलता केवल परिश्रम से नहीं, बल्कि शांति, धैर्य, गंभीरता और सामूहिक प्रयास से मिलती है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ की कृपा से ही यह विशाल धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।

